पंजाब में 429 करोड़ के जीएसटी घोटाले का खुलासा
लुधियाना में ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक पर एफआईआर दर्ज
जालंधर में लोहा कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी
सोढल इंडस्ट्रियल इलाके के ट्रांसपोर्टर पर भी शिकंजा
जालन्धर - एस एन एन
पंजाब सरकार के आबकारी एवं कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खुलासा करते हुए कहा है कि जांच में करीब 429.30 करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी सामने आई है। देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय 62 आपस में जुड़ी फर्मों की पहचान की गई है, जिनमें पंजाब की लगभग 25 फर्में शामिल हैं। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के तहत राज्य के कर विभाग ने यह कार्रवाई की।
लुधियाना के थाना डिवीजन नंबर-4 में 13 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में श्री बालाजी ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक हर्ष थापर और उनके सहयोगियों सम्मी धीमान, जस समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
जालंधर और मंडी गोबिंदगढ़ के कुछ बड़े कारोबारी और ट्रांसपोर्टर के नाम भी आए हैं। इसे लेकर विभाग की टीम ने जालंधर के कुछ कारोबारी ठिकानों पर छापेमारी भी की है। सोढल इंडस्ट्रियल इलाके में एक बड़े ट्रांसपोर्टर का भी नाम इसमें जुड़ रहा है। फिलहाल पुलिस और जीएसटी विभाग संयुक्त रूप से जांच में जुट गई है।
वित्त मंत्री के मुताबिक, जांच में 2,410.22 करोड़ रुपये की कर योग्य राशि पर 429.30 करोड़ रुपये जीएसटी धोखाधड़ी का आरोप सामने आया है। वहीं, एक ट्रांसपोर्ट कंपनी से जुड़े करीब 2,450 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच के दौरान इस नेटवर्क का पता चला।
जांच के दायरे में 62 फर्में आई हैं, जिनमें से लगभग 25 पंजाब में सक्रिय बताई गई हैं। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि फर्जी लेनदेन में कौन-कौन सी फर्में शामिल थीं और किन कारोबारियों ने इसका लाभ उठाया।
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि मामले की जांच 30 सितंबर को शुरू हुई थी। उस दिन राज्य कर विभाग की खुफिया एवं रोकथाम इकाई ने दिल्ली से पंजाब आ रहे माल से लदे एक वाहन को रोका।
वाहन के ई-वे बिल और अन्य बिलों में माल की आपूर्ति पंजाब की तीन फर्मों को दिखायी गई थी। हालांकि, संबंधित फर्मों ने माल का ऑर्डर देने और खरीदने से इनकार कर दिया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता और केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपों की पुष्टि और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण जांच के बाद होगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े पूरे नेटवर्क की आपराधिक जांच पुलिस को सौंप दी गई है। कर विभाग को नेटवर्क से जुड़े लाभार्थी कारोबारियों की जांच करने और कथित तौर पर अनुचित तरीके से लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्र बता रहे हैं कि लुधियाना में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस और जीएसटी की टीम ने जालंधर के कुछ कारोबारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की है। इंडस्ट्रियल इलाके का एक बड़ा ट्रांसपोर्टर और कुछ लोहा कारोबारी इसमें शामिल हैं। फिलहाल विभागीय अधिकारियों ने अभी तक किसी का नाम नहीं बताया है। सूत्र बताते हैं कि कारोबारियों पर करोड़ों रुपए का जुर्माना ठोका गया है। इसमें इन कारोबारियों को जेल भी हो सकती है।
फिलहाल मामले को रफा दफा करने के लिए सियासी दबाव भी शुरू हो गया है। अब देखना यह है कि जालंधर के कारोबारियों और ट्रांसपोर्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है या फिर लाखों रुपए देकर सैटिंग होगी? फिलहाल इस मामले में विभाग का कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।