पंजाब कांग्रेस को झटका - सीमांत क्षेत्र में राजनिति के नये समीकरण
जलालाबाद से कांग्रेस के पूर्व विधायक रमिंदर सिंह आवला शिरोमणि अकाली दल में हुए शामिल
चण्डीगढ़ - बिग बॉस इण्डिया टूडे न्यूज
पंजाब की राजनीति में कांग्रेस को भारी झटका लगने की खबर है।जलालाबाद से कांग्रेस के पूर्व विधायक रमिंदर सिंह आवला शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। चंडीगढ़ में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
उनके पार्टी बदलने को पंजाब में आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर आवला का पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने जलालाबाद से अपने पुराने राजनीतिक जुड़ाव और अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जलालाबाद के लोगों ने उन्हें तीन बार क्षेत्र की सेवा करने का अवसर दिया।
आवला के अकाली दल में शामिल होने से सीमावर्ती फिरोजपुर-फाजिल्का क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है।
रमिंदर सिंह आवला की कांग्रेस से नाराजगी की चर्चा उस समय तेज हुई थी, जब पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने परिवार के एक से अधिक सदस्यों को चुनावी टिकट देने के मुद्दे पर टिप्पणी की थी। 4 अगस्त को फिरोजपुर में एक जनसभा के दौरान वड़िंग ने कहा था कि बड़े नेता खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं और अपने बेटों के लिए भी टिकट मांगते हैं।
फिरोजपुर में कांग्रेस के भीतर रमिंदर सिंह आवला और सांसद शेर सिंह घुबाया के बीच टिकट को लेकर खींचतान पहले भी चर्चा में रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शेर सिंह घुबाया शिरोमणि अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध की खबरें सामने आई थीं।
रमिंदर सिंह आवला का अकाली दल में शामिल होना जलालाबाद और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। पूर्व विधायक होने के कारण उनका स्थानीय राजनीतिक संपर्क और अनुभव अकाली दल के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम क्षेत्र में पार्टी संगठन और नेताओं के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, इस बदलाव का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, रमिंदर सिंह आवला के अकाली दल में शामिल होने से पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।