अग्निवीरों की सेवा में विस्तार, दो साल कार्यकाल ओर बढ़ा
चुनावी आहट से घबराई केंद्र की भाजपा सरकार ने लिया यू टर्न
नई दिल्ली। बी बी आई टी न्यूज
जब चुनावी चौसर पर जब अपनी ही बुनी चालें गले की फांस बनने लगें, तो क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बताई गई नीतियों की रीढ़ मोड़ते हुए देर नहीं लगती।
केंद्र सरकार ने आखिरकार अपनी बहुचर्चित अग्निपथ योजना में वह बहुप्रतीक्षित और बड़ा यू-टर्न ले ही लिया है, जिसका औपचारिक ऐलान आज खुद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने कैबिनेट के मुहर लगाने के बाद किया। नए फरमान के मुताबिक चार साल पूरे होने के बाद जिन 25% को पक्की नौकरी और बाकी 75% को सिर्फ़ सेवा निधि देकर घर लौटाने का कड़ा नियम था, अब उन 75% अग्निवीरों को भी दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देकर कुल कार्यकाल 6 साल का रास्ता खोल दिया गया है, ताकि उसके बाद भी वे मेरिट के आधार पर नियमित सेवा में जाने की दौड़ में बने रह सकें।
अब इस तथाकथित दिवाली-उपहार के पीछे की असली सियासी मजबूरी को समझिए—दिसंबर 2026 में अग्निवीरों का पहला बैच (लगभग 18,300 जवान) चार साल की मियाद पूरी करके सेना से बाहर होने वाला था, और ठीक इसी के मुहाने पर उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की चुनावी सरगर्मियां खड़ी हैं!
सरकार और संगठन को अंदरूनी सर्वे से जो ज़मीनी फीडबैक मिला, उसने सत्ता के गलियारों में कंपकंपी पैदा कर दी थी, खासकर वीरभूमि उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के फौजी परिवारों में यह ख़ौफ़नाक संदेश जा रहा था कि 22-23 साल के हज़ारों हथियारबंद ट्रेंड नौजवान बिना पेंशन और बिना स्थायी भविष्य के गांवों में खाली हाथ लौटेंगे।
2024 के लोकसभा नतीजों में अग्निवीर योजना के नाम पर मिले झटके के बाद हुकूमत यह भली-भांति जानती थी कि अगर दिसंबर में 18 हज़ार अग्निवीर खाली हाथ अपने-अपने कस्बों में उतरे, तो चुनावी सभाओं में राष्ट्रवाद के भाषणों से इस गुस्से पर पर्दा डालना नामुमकिन हो जाएगा। जो योजना कल तक सेना को युवा और चुस्त बनाने का सबसे अचूक और अपरिवर्तनीय फॉर्मूला बताई जा रही थी, उसे वोट बैंक के गणित और चुनावी झटकों के डर ने चुपचाप बदलवा दिया।
यानी युवाओं के भविष्य की चिंता भले ही चार साल तक फाइलों में दबी रही हो, लेकिन जैसे ही चुनावी बैलेट बॉक्स पर गाज गिरने की आहट हुई, वैसे ही नीति निर्माताओं को अग्निवीरों की सेवा दो साल आगे बढ़ाने की दिव्य प्रेरणा मिल गई!