बिहार - बांकीपुर में भाजपा की करारी हार, एनडीए में खलबली
जन सुराज पार्ट प्रमुख प्रशांत किशोर ने खोला खाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले नीतीश कुमार
बिहार (बांकीपुर) - बिग बॉस इण्डिया टूडे न्यूज
बांकीपुर उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त ने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जन सुराज के प्रशांत किशोर की इस ऐतिहासिक जीत के बाद अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बीच बैठक हो रही है, जिसने राज्य के भविष्य पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के आए नतीजों ने सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खेमे में भूचाल ला दिया है। बीजेपी के तीन दशक पुराने इस अभेद्य किले पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19,000 से अधिक वोटों से शानदार जीत दर्ज की है।
इस करारी हार के तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई एक उच्चस्तरीय मुलाकात ने राज्य के सियासी हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
बांकीपुर सीट को बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था। वर्ष 1995 से इस सीट पर पार्टी का कब्जा रहा पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और फिर उनके पुत्र व बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यहां से लगातार जीतते रहे। लेकिन इस बार, उपचुनाव में जन सुराज के पीके ने पूरी बाजी ही पलट दी।
बांकीपुर का परिणाम केवल एक सीट की हार-जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद जनता के पहले रिपोर्ट कार्ड के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच नीतीश कुमार और पीएम मोदी के बीच हुई चर्चा को बेहद अहम माना जा रहा है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि परिणाम उसकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि भाजपा जनता के जनादेश का सम्मान करती है और जहां जीत मिली है, वहां मतदाताओं का आभार व्यक्त करती है, वहीं जिन सीटों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली, वहां पार्टी गंभीरता से आत्मविश्लेषण करेगी।
नितिन नवीन ने कहा कि गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर जनता ने भाजपा को समर्थन देकर भरोसा जताया है। जिसके लिए पार्टी सभी मतदाताओं की आभारी है। हालांकि बांकीपुर और दतिया विधानसभा सीटों पर मिले नतीजों ने संगठन को सोचने पर मजबूर किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन दोनों सीटों पर पार्टी को जिस तरह के जनादेश की उम्मीद थी, वह नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि भाजपा इन परिणामों को केवल हार के रूप में नहीं देख रही, बल्कि जनता के संदेश के रूप में ले रही है। पार्टी प्रत्येक स्तर पर समीक्षा करेगी, स्थानीय संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक हर पहलू का मूल्यांकन किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
प्रशांत किशोर ने इसे बांकीपुर की जनता का फैसला बताते हुए कहा कि यह चुनाव केवल विधायक चुनने का नहीं, बल्कि बिहार के विकास, बेहतर शिक्षा और रोजगार की दिशा में एक स्पष्ट संदेश देने का था। दूसरी ओर, बीजेपी नेतृत्व ने इस नतीजे को स्वीकार करते हुए गंभीरता से आत्ममंथन करने की बात कही है।
इस नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एनडीए अपनी रणनीतियों में बदलाव करेगा या बिहार की राजनीति में किसी नए तीसरे विकल्प की जड़ें और मजबूत होंगी।