भाजपा विशेष 'कार्यकर्ता कल्याण प्रकोष्ठ' या समिति का गठन करे
भाजपा कार्यकर्ता रविन्द्र धीर ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को लिखा पत्र
भाजपा कार्यकर्ताओं के मनोबल संवर्धन तथा बलिदान देने वाले कार्यकर्ताओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनाए - रविन्द्र धीर
जालन्धर - नूपुर महेन्द्रू
भाजपा कार्यकर्ता रविन्द्र धीर ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को एक पत्र लिखकर कहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के मनोबल संवर्धन तथा बलिदान देने वाले कार्यकर्ताओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनाया जाए।
उन्होनें इस पत्र के माध्यम से पार्टी अध्यक्ष का ध्यान पार्टी के उन निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ताओं की ओर आकर्षित करने के लिए आग्रह किया है जो भारतीय जनता पार्टी के विचार और संगठन के आधारस्तंभ हैं।
धीर ने कहा कि भाजपा की विचारधारत्मक यात्रा और ऐतिहासिक सफलताओं के पीछे उन लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम, पसीना और बलिदान छिपा है, जो निस्वार्थ भाव से धरातल पर कार्य करते हैं।
उन्होनें राष्ट्रीय अध्यक्ष को संगठन और अधिक सशक्त बनाने तथा कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने का विनम्र अनुरोध है। धीर ने कहा कि विभिन्न राज्यों में पार्टी के कार्यक्रमों, आंदोलनों और सांगठनिक गतिविधियों के दौरान जिन कार्यकर्ताओं ने हिंसक घटनाओं या प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने प्राणों की आहुति दी है, उनके परिवारों की सुध लेना अत्यंत आवश्यक है।
ऐसे पीड़ित परिवारों को एक निश्चित एवं सुदृढ़ आर्थिक सहायता पैकेज, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था और परिवार के किसी सदस्य के लिए आजीविका का साधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि वे स्वयं को असहाय न महसूस करें।
पंजाब में नशामुक्त यात्रा के दौरान मानसा में सड़क दुर्घटना में व जालन्धर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी की रैली के दौरान हार्ट अटैक से हमारे कार्यकर्ता ने अपनी जान गंवाई है जोकि अति दुखनीप है।
जिस कार्यकर्ता ने पार्टी के झंडे को ऊंचा रखने के लिए अपनी जान गंवाई, उसके परिवार की देखरेख के लिए जिला एवं प्रदेश स्तर पर एक विशेष 'कार्यकर्ता कल्याण प्रकोष्ठ' या समिति का गठन हो, जो नियमित रूप से इन परिवारों के संपर्क में रहे।
श्री धीर ने कहा कि बूथ और मंडल स्तर पर समर्पित भाव से काम कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना जाए। निर्णय प्रक्रिया और स्थानीय कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता बढ़ाकर उनके आत्मसम्मान को बल दिया जाना चाहिए।