25 सितम्बर 2026
सिद्ध श्री बाबा सोढल जी का मेला
चड्ढा बिरादरी की आस्था
जालन्धर की अमूल्य धरोहर
संपादकीय
रमेश महेन्द्रू - मुख्य संपादक
बिग बॉस इण्डिया टूडे
जालन्धर शहर की पहचान केवल उसके आधुनिक विकास, व्यापार और उद्योग से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से भी है। इसी विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय है सिद्ध श्री बाबा सोढल जी का वार्षिक मेला, जो हर वर्ष श्रद्धा और आस्था के साथ आयोजित किया जाता है।
बाबा सोढल जी से जुड़ी परंपरा विशेष रूप से चड्ढा बिरादरी की धार्मिक आस्था और विरासत से जुड़ी मानी जाती है। जिला जालन्धर व चड्डा बिरादरी के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, बाबा सोढल जी का जन्म चड्ढा परिवार में हुआ तथा मेले के साथ चड्ढा बिरादरी की अनेक पारंपरिक धार्मिक रस्में जुड़ी हुई हैं।
समय व आस्था के साथ यह मेला केवल एक बिरादरी तक सीमित न रहकर व्यापक श्रद्धा का केंद्र बन गया है। आज विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों से श्रद्धालु बाबा जी के दर्शन करने, सरोवर में श्रद्धा व्यक्त करने तथा परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के लिए आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल अतुल्य भारत ने भी बाबा सोढल मंदिर को जालन्धर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताया है।
चड्ढा बिरादरी के लिए यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी पीढ़ियों पुरानी परंपरा, संस्कार और सामुदायिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है। ऐसी परंपराएं हमें अपने इतिहास से जोड़ती हैं और यह स्मरण कराती हैं कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संजोकर रखना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
बाबा सोढल मेले की एक विशेषता यह भी है कि यहां आस्था के साथ-साथ सेवा, भाईचारे और सामाजिक एकता की भावना दिखाई देती है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था बनाए रखना, स्वच्छता का ध्यान रखना, यातायात नियमों का पालन करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
25 सितम्बर 2026 को जब जालन्धर बाबा सोढल जी की भक्ति में रंगेगा, तब यह अवसर हमें अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ चड्ढा बिरादरी की ऐतिहासिक विरासत और जालन्धर की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने का संदेश भी देगा।
सिद्ध श्री बाबा सोढल जी के पावन मेले की सभी श्रद्धालुओं, चड्ढा बिरादरी तथा देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
बाबा जी सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करें।