पंजाबी संस्कृति व सभ्यता का पर्व तीज की रही धूम रही
“तीज की रानी” जसलीन कौर और “पंजाबी मुटियार” बनी रिधिमा
जालन्धर - एस एन एन
गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी कॉलेज में पंजाबी लोक-विरासत, सांस्कृतिक रंगों और पारंपरिक उमंग के साथ तीज का त्योहार मनाया गया। इस अवसर पर कॉलेज का प्रांगण पंजाबी संस्कृति की पारंपरिक रंगत से सजा हुआ नजर आया और छात्राओं ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लेते हुए पंजाबी विरासत के साथ अपने जुड़ाव को और गहरा किया।
समारोह में समाजसेविका निधि कोहली ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की रौनक को और बढ़ा दिया। तीज के पारंपरिक त्योहार से जुड़ी पींग, लोक-रंग और सांस्कृतिक माहौल ने कॉलेज के प्रांगण को पंजाब के प्राचीन लोक-जीवन की यादों से सराबोर कर दिया।
कॉलेज की छात्राओं ने तीज के इस समारोह में बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। पारंपरिक परिधानों, लोकगीतों, गिद्धा, पींग के झूलों और पंजाबी संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों ने समारोह को खास बना दिया। छात्राओं के चेहरों पर दिखाई दे रही खुशी और उत्साह ने तीज के त्योहार की वास्तविक भावना को जीवंत कर दिया।
श्रीमती निधि कोहली और श्री नितिन कोहली मुख्य अतिथि तथा डॉ. कुलवंत सिंह सिंह विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। श्रीमती निधि कोहली ने छात्राओं के साथ पींग झूलकर तीज की खुशियां साझा कीं। छात्राओं के साथ इस तरह घुल-मिलकर पंजाबी लोक-परंपरा का हिस्सा बनना समारोह का विशेष आकर्षण रहा। उन्होंने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पंजाबी विरासत हमारी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे समारोह बहुत महत्वपूर्ण हैं।
इस अवसर पर कॉलेज ओएसडी प्रो. (डॉ.) नवजोत ने कहा कि तीज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पंजाबी लोक-जीवन की साझा यादों, रिश्तों की मिठास, लोकगीतों, पींगों और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा एक अनूठा लोक-उत्सव है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़कर रखना समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि विद्यार्थियों में अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत के प्रति गर्व की भावना पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तीज जैसे लोक-त्योहार नई पीढ़ी को पंजाब की प्राचीन परंपराओं से जोड़ने का सुंदर माध्यम हैं।
समारोह के दौरान कॉलेज का माहौल पंजाबी लोक-संस्कृति की रंगीन यादों से सराबोर रहा। पींगों के झूलों, पारंपरिक रंगत और छात्राओं की चहल-पहल ने जैसे पुराने पंजाब की वह तस्वीर फिर से साकार कर दी, जहां तीज केवल एक त्योहार नहीं था, बल्कि मिलने-जुलने, आपसी सहभागिता और खुशियां बांटने का एक सुखद अवसर हुआ करता था। इस समारोह में “तीज की रानी” जसलीन कौर और “पंजाबी मुटियार” रिधिमा को चुना गया।
इस अवसर पर सुरिंदर सैनी, डॉ. आशीष अरोड़ा, डॉ. लखवीर सिंह, डॉ. सोनिया कुंद्रा, डॉ. मनदीप कौर, डॉ. नेहा कालड़ा और डॉ. परविंदर कौर ढिल्लों सहित कॉलेज का स्टाफ तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी कॉलेज, लाडोवाली रोड में मनाया गया यह तीज का त्योहार पंजाबी विरासत की जड़ों के साथ नई पीढ़ी के जुड़ाव को और मजबूत करने वाला साबित हुआ। पींग के हर झूले और तीज की हर रंगीन झलक में पंजाब की मिट्टी से जुड़ी वह सांस्कृतिक खुशबू महसूस हुई, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी पंजाबी समाज की पहचान को जीवंत बनाए रखती आ रही है।